Hindi alphabet ,(हिंदी में कुल कितने अक्षर होते हैं ,परिभाषा भेद उदाहरण एवं प्रयोग)-Hindi Varnamala

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(हिंदी में कुल कितने अक्षर या वर्ण होते हैं ,परिभाषा भेद प्रयोग एवं उदाहरण) – Hindi Varnamala

परिचय(Introduction) ‘Hindi’ जो एक भाषा हैं तथा Alphabet का अर्थ अक्षर या वर्ण(Sound) होता हैं , हिंदी(Hindi) भाषा  को शुद्ध- शुद्ध पढ़ने लिखने तथा  बोलने के लिए हिंदी व्याकरण का अध्ययन करना पड़ता हैं  जिसके अंतर्गत बहुत सारे चीजें आते हैं जैसे- वर्ण,संज्ञा,सर्वनाम,विशेषण,अव्यय,प्रत्यय,आदि लेकिन इसमें सबसे पहले  वर्णो का अध्ययन करना पड़ता हैं जो हिंदी व्याकरण का आधार हैं, यह व्याकरण का ऐसा अंग हैं जिसका अध्ययन सबसे पहले करना पड़ता  हैं  अर्थात  वर्ण  को  बिना जाने  व्याकरण को  समझने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं , मतलब हैं  वर्णमाला को जाने बिना आगे  बढ़ नहीं सकते हैं।

hindi alphabet जिसका हिंदी अर्थ अक्षरमाला होता हैं जिसे  वर्णमाला(Hindi varnamala) भी  कहा जाता  हैं दोनों का अर्थ  समान ही हैं अतः इस पेज में हिंदी अक्षरमाला अथवा हिंदी वर्णमाला के बारे में सम्पूर्ण जानकारियां  प्रदान की जा रही हैं। 

 

 Hindi alphabet chart 

हिंदी अक्षरमाला अथवा हिंदी वर्णमाला क्या हैं ? –  अक्षर माला का अर्थ अक्षरों का समूह होता हैं और वर्णमाला का भी अर्थ वर्णो का समूह होता हैं जिस समूह में वह सारे वर्ण होते हैं जिसके प्रयोग से शब्दों एवं वाक्यों का निर्माण करते हैं अर्थात अक्षरमाला के अंतर्गत वे सभी वर्ण सम्मलित हैं जिसे हिंदी भाषा मूल आधार माना जाता हैं जिसके बिना हिंदी भाषा के एक भी शब्द को बोलना असंभव हैं ।  हम  किसी भी अक्षर का उच्चारण करते हैं अथवा जो भी बोलते हैं उसमें वर्ण एवं वर्णों  का मात्रा लगा होता हैं जैसे – बादल एक शब्द हैं जिसमें तीन अक्षर हैं तथा का ा  मात्रा लगा हैं।

वह तीन अक्षर  ब , द  और ल  हैं और में आ का मात्रा लगा हैं  जिसे में लगाने पर ‘बा’ बन जाता हैं । मतलब –  ब + ा + द + अ + ल + अ = बादल , जो सभी वर्ण हैं । 

 

 

वर्ण किसे कहते हैं – आवाज(ध्वनि) के मूल इकाई को वर्ण  कहा जाता हैं या आप यह भी कह सकते हैं की – ध्वनि का वह सार्थक रूप जिसका उच्चारण प्राकृतिक हो, जो किसी भाषा के निर्माण में मूल रूप से सहायता करता हो तो वह वर्ण कहलाता हैं।

(आप बहुत सारे जगह पढ़े होंगें की वर्ण उस मूल ध्वनि को कहा जाता हैं जिसका खंड या टुकड़ा नहीं किया जा सकें लेकिन यह तो स्वर वर्ण के लिए भी सम्पूर्ण सत्य हैं क्योंकि यदि आप स्वर वर्ण को परिभाषित करते हैं तो भी यही  कहेंगें की जिस ध्वनि का टुकड़ा नहीं किया जा सकें तो वह स्वर वर्ण  कहलाता हैं अब आप थोड़ा सोचिए क्या वर्ण एवं स्वर वर्ण का परिभाषा एक ही हो सकता हैं ‘तो नहीं’ अंतर तो आवश्य होनी चाहिए।)

 

Note – आपको समझाना चाहिए की हमारे मुंह से निकलने वाली हर एक आवाज कोइ-न-कोइ ध्वनि जरूर होता हैं जिसका सार्थक रूप ही वर्ण बन जाता हैं दूसरी शब्दों में कहे तो ध्वनि का वह  मूल सार्थक  रूप जिससे द्वारा किसी अक्षर अथवा शब्द का निर्माण किया जा सकें तो वह वर्ण कहलाता हैं जिसमें शार्थकता का प्रधानता रहती हैं क्योंकि कोयल  मैंने कौवे की आवाज से कोइ वर्ण नहीं बनता हैं हाँ सुनने में मधुर जरूर लग सकता हैं ।)

 

 वर्ण के दो भेद होते हैं – (1) स्वर वर्ण(Vowel sound)  (2) व्यंजन वर्ण(Consonant sound)  जिसकी जानकारियां निचे दी जा रही हैं ।

(Note – Hindi alphabet में प्रमुख रूप से स्वर वर्ण तथा व्यंजन वर्ण के बारे में पढ़ा जाता हैं जिसके अंतर्गत इन दोनों वर्णों के कई सारे रूपों का अध्ययन किया जाता हैं जो या तो स्वर वर्ण के अंदर आते हैं अथवा व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आते हैं निचे के तालिका को देखकर आप इस बात को आसानी से समझ सकते हैं की स्वर वर्ण में क्या- क्या पढ़ना हैं तथा व्यंजन वर्ण में क्या- क्या पढ़ना हैं , अतः इनके अंतर्गत आने वाली हर एक चीज की जानकारियां प्रदान की गई हैं।)

 

 

हम इस पेज में निम्नलिखित के बारे में जानकारी  प्रदान कर रहे हैं – 

स्वर वर्ण के बारे में –व्यंजन वर्ण के बारे में –
1 . अक्षर क्या हैं ?1 . व्यंजन वर्ण क्या हैं 
2 . स्वर वर्ण क्या हैं2 . स्पर्श वर्ण या वर्गीय वर्ण किसे कहते हैं ?
3 .  स्वरों का वर्गीकरण3 . अन्तस्थ वर्ण 
4 .  दीर्घ संधि स्वर4 . उष्म वर्ण 
5 . संयुक्त संधि स्वर5 . अल्पप्राण तथा  महाप्राण 
6 .  काल- मान के अनुसार – स्वर वर्ण के भेद ।6 . अनुनासिक अल्पप्राण 
7 .  ह्रस्व स्वर7 . घोष तथा अघोष वर्ण 
8 .  दीर्घ स्वर8 . हलन्त
9 .  प्लुत स्वर9 . वर्णों का उच्चारण स्थान ।
10 .  अयोगवाह किसे कहते हैं ?इसके बाद निम्न के बारे में जानकारी प्रदान की गई हैं- 
11 . सवर्ण या सजातीय स्वर1 . बलाघात या स्वराघात किसे कहते हैं ?
12 . असवर्ण या विजातीय स्वर2 . सुरलहर अथवा अनुतान( Intonation) किसे कहते हैं ?
13 . मात्रा किसे कहते हैं ?3 . संगम(Juncture) संहिता किसे कहते हैं ?
14 . मात्रा के संकेत4 . अल्पविराम संगम ( Comma juncture) किसे कहते हैं ?
15 . अनुनासिक तथा निरनुनासिक स्वर क्या हैं?5 . वर्णों का प्रयोग 

 

 

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1 . अक्षर किसे कहते हैं ? – सामान्य रूप से वर्ण और अक्षर दोनों एक ही हैं बस प्रायोगिक दृष्टिकोण से थोड़ा अंतर देखने को मिलते हैं लेकिन यह उतना विशेष नहीं हैं जिसके बारे में चर्चा जरूर करेंगें , दूसरी बात वर्ण का परिभाषा ऊपर बता चुके हैं अतः जो वर्ण का परिभाषा होता हैं वही अक्षर का भी परिभाषा होता हैं। 

वर्ण और अक्षर में अंतर- कोइ खास अंतर नहीं हैं जिस वर्ण में मात्रा  लगा होता हैं वह अक्षर कहलाता हैं  और जिस वर्ण में मात्रा नहीं लगा होता हैं वह वर्ण कहा जाता हैं बस यह  इतना तक ही सिमित हैं ।

 

2 . स्वर वर्ण क्या हैं ? – जिस वर्ण को बोलते समय अथवा उच्चारण करते समय अन्य किसी भी वर्ण का सहायता लेना न पड़ता हैं तो वह स्वर वर्ण कहा जाता हैं जो अ आ इ ई उ ऊ  से लेकर ए  ऐ ओ औ  ऋ तक हैं जिनकी संख्या 11 हैं और बाकी व्यंजन वर्ण हैं । 

जैसे – अ स्वर हैं जिसको बोलते समय किसी दूसरे वर्ण का उच्चारण नहीं होता हैं । 

आ स्वर वर्ण हैं जिसके उच्चारण में दुसरा कोइ भी वर्ण सम्मलित नहीं होते हैं अकेले आ ही रहते हैं । 

इ एक स्वर वर्ण हैं जिसे आप बोलते हैं तो इसके उच्चारण में दूसरा कोइ भी वर्ण नहीं आते हैं अकेले इ रहता हैं ।

इस प्रकार आगे के भी स्वर वर्ण के उच्चारण में दुसरा कोइ वर्ण नहीं आता हैं। 

 

 

3 .  स्वरों का वर्गीकरण

उत्पति  के अनुसार स्वर के दो भेद हैं जो निम्नलिखित हैं –

 (1) मूल स्वर या ह्रस्व  –जो स्वर दूसरे स्वरों के मेल से न बनता हो तो वह मूल स्वर कहलाता हैं जिसकी संख्या चार हैं जो – अ , इ , उ , ऋ हैं , कहने का मतलब हैं की इन चारों वर्णों की उत्पति में किसी  भी दूसरे स्वर का योग नहीं होता हैं , स्वंग मौजूद रहते हैं । 

(2) संधि स्वर – जिस स्वर की उत्पति  किसी दूसरे स्वरों के योग होता हैं तो वह संधि स्वर कहा जाता हैं hindi alphabet में इनकी संख्या सात हैं जो कि – आ , ई , ऊ , ए , ऐ ,ओ , औ हैं वास्तव में इन स्वरों का प्रयोग संधि विच्छेद करते समय विशेष महत्पूर्ण होता हैं । अब संधि स्वर के दो उपभेद हैं- दीर्घ एवं संयुक्त संधि स्वर जिसके बारे में निचे जानकारियां दी जा रही हैं। 

 

4 . दीर्घ संधि स्वर- दो समान मूल स्वर के मिलने से जो स्वर बनता हैं वह दीर्घ संधि स्वर कहलाता हैं । 

जैसे –

अ + अ = आ 

इ + इ = ई 

ऋ + ऋ = ऋ , आदि । 

 

5 . संयुक्त संधि स्वर- दो भिन्न स्वरों के मिलने से जो स्वर बनता हैं वह संयुक्त स्वर कहा जाता हैं , अर्थात इसमें दो भिन्न अलग – अलग स्वर आपस में मिलते हैं और इनके मिलने से जो नया स्वर बनता हैं वही संयुक्त स्वर कहलाएगा । 

जैसे – 

अ + इ = ए 

अ + उ = ओ 

आ + औ = औ , आदि ।

(Note- स्वर का तात्पर्य स्वर वर्ण से  हैं अतः इसमें Confused होने की आवश्यकता नहीं हैं ।)

 

 

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6 .  काल- मान के अनुसार – स्वर वर्ण के भेद – 

इसके अनुसार भी दो भेद हैं जो ह्रस्व और दीर्घ स्वर हैं जिसकी जानकारी  निचे 7 तथा 8 नंबर में दिया गया हैं।

 

(7) ह्रस्व स्वर – जिस स्वर के उच्चारण में एक मात्रा लगता हो तो वह ह्रस्व स्वर कहा जाता हैं ।

जैसे –  उ , इ ,अ

 

 

(8) दीर्घ स्वर – जिस स्वर के उच्चारण में दो मात्रा लगे तो वह दीर्घ स्वर कहलाता हैं ।

जैसे – आ , ई , ऊ । 

 

 

9 .  प्लुत स्वर- प्लुत का अर्थ होता हैं उछला हुवा अतः इसमें तीन मात्रा लगता हैं  इस प्रकार हम कह सकते हैं की जिस स्वर के उच्चारण में तीन मात्रा लगे तो वह प्लुत स्वर कहा जाता हैं, इसका प्रयोग चिल्लाने में , किसी को बुलाने में , हल्ला करने में, रोने में , गाने में आदि ।

जैसे – रे श्याम , ओउम , हे राजू , आदि ।

 

 

 

10 .  अयोगवाह किसे कहते हैं ? – अनुस्वार और विसर्ग अयोगवाह कहलाते हैं जिसे व्यंजन वर्ण के अंतर्गत रख दिया जाता हैं लेकिन वास्तव में न तो स्वर हैं और न यह व्यंजन हैं , हाँ यह स्वरों के सहारे आवश्यक चलते हैं।

 

 

11 . सवर्ण या सजातीय स्वर  – समान स्थान और प्रयत्न से उत्पन्न होने वाली स्वरों को स्वर्ण अथवा सजातीय स्वर कहा जाता हैं ।

जैसे – अ आ सवर्ण हैं ।

इ , ई  सवर्ण  हैं ।

इसी प्रकार  उ , ऊ  भी  सवर्ण हैं।

 

 

 

12 . असवर्ण या विजातीय स्वर- जिन स्वरों के स्थान और प्रयत्न एक-से-नहीं होते हैं  तो वह असवर्ण कहलाता हैं । 

जैसे –

अ  , इ असवर्ण हैं।

अ  , ई  असवर्ण  हैं। 

इ, ऊ भी असवर्ण हैं।

 

 

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13 . मात्रा किसे कहते हैं ? – वर्णों को बोलने के लिए जितना समय लगता हैं वही मात्रा कहलाता हैं अर्थात किसी  भी वर्ण को बोलते हैं तो उसमें समय तो जरूर लगता हैं वही मात्रा कहे जाते हैं , दूसरी बात यह हैं की मात्रा स्वर वर्ण का होता हैं मतलब स्वर वर्ण का ही होता हैं और आप यह भी जानते हैं की स्वर वर्ण की संख्या कितना हैं जिसके बारे में ऊपर जानकारिया दी गई हैं।

 

 

14 . मात्रा के संकेत-

स्वर वर्ण संकेत 
अ नहीं हैं ।
आ 
ि
उ 
ऊ 
ै 
ो 
अं 
अ::
ऋ 

 

15 . अनुनासिक तथा निरनुनासिक स्वर क्या हैं?

अनुनासिक – जिन स्वरों का उच्चारण नाक तथा मुँह से हो तो वह अनुनासिक स्वर कहा जाता हैं जिसका चिन्ह चन्द्रबिन्दु होता हैं इसके उच्चारण में लघुता रहती हैं । जैसे – मुँह , आँख , दाँत , आँगन आँच आदि ।

 

निरनुनासिक- मुँह से बोली जानी वाली स्वर को निरनुनासिक स्वर कहा जाता हैं । 

जैसे – इधर , उधर , अपना , पवन आदि ।

 

अनुस्वार युक्त – जिन स्वरों का उच्चारण दीर्घ होता हैं तो उनकी ध्वनि नाक से निकलती हैं ।

जैसे – अंगूर , अंगुली , अंगद , अंदर , कंगन आदि । 

 

विसर्ग युक्त – इसका चिन्ह-  होता हैं , यह भी अनुस्वार की तरह स्वर के बाद आता हैं और इसका उच्चारण ‘ह’होता हैं ।

जैसे – प्रायः , प्रातः , दुःख , पयः आदि ।

 

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व्यंजन वर्ण के बारे में –

1 . व्यंजन वर्ण क्या हैं – जब हम किसी वर्ण का उच्चारण करते हैं और यदि उसके उच्चारण में स्वर वर्ण का सहायता लेना पड़े तो वह व्यंजन वर्ण कहलाता हैं अर्थात व्यंजन वर्ण को बोलने के लिए स्वर वर्ण का सहायता लेना पड़ता हैं जिसकी संख्या 41 हैं जो क , ख , ग घ से लेकर  क्ष , त्र , ज्ञ तक हैं मतलब की स्वर वर्ण को छोड़कर बाकी के जितने भी वर्ण हैं वह व्यंजन वर्ण कहलाता हैं , हाँ इसमें अन्तस्थ घोष अघोष आदि वर्ण आ सकते है  लेकिन रहता व्यंजन वर्ण ही हैं इसलिए आपको असमंजस में आने की आवश्यकता नहीं हैं । एक बार पुनः कहते हैं अ ख ग से लेकर त्र , ज्ञ तक में जितने भी वर्ण आते हैं वह व्यंजन वर्ण हैं और इसके बाद बारह खाड़ी आते हैं जिसको बनाने के किसी भी व्यंजन वर्ण के साथ में स्वर वर्ण के मात्रा को जोड़ना पड़ता हैं जिससे व्यंजन वर्ण बन जाता हैं। 

व्यंजन वर्ण में निम्नलिखित वर्ण आते हैं।

जैसे – कवर्ग , चवर्ग , टवर्ग , तवर्ग , पवर्ग  और य र ल व के सभी वर्ण आते हैं इसके बाद ड़ , ढ़ , लृ भी सम्मलित हो जाते हैं । कवर्ग का मतलब   क ख ग घ ङ होता हैं , चवर्ग का मतलब च , छ , ज , झ ञ होता हैं और आगे का भी वर्ग में उसके सम्पूर्ण अक्षर होते हैं।

 

 Note- आप जब पढ़ाई शुरुआत किए होंगें तो सबसे पहले अ आ से य र ल व तक सीखे होंगें फिर इसके बाद  क का कि की को सीखें होंगें । एक ही बात याद रखना हैं स्वर वर्ण के अलावा जो भी वर्ण आयेंगें वह सब व्यंजन वर्ण के अंतर्गत आयेंगें अब इसे लिखकर बताने की क्या आवश्यकता हैं इसे आप वर्णमाला में अच्छीतरह से पढ़ सकते हैं । 

 

 

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इन्हें पढ़े – वर्णमाला क्या हैं ?

 

 

2 . स्पर्श  या वर्गीय वर्ण – आप जानते हैं की पाँच- पाँच व्यंजन  वर्ण का एक वर्ग होता  हैं और इन वर्गों की संख्या पाँच हैं जिन्हें स्पर्श वर्ण कहा जाता हैं , और  इसे स्पर्श वर्ण इसलिए कहा जाता हैं क्योंकि इन वर्णों का उच्चारण मुँह के विभिन्न  स्थान जैसे – कंठ , तालु , मूर्धा , दाँत , ओष्ठ से होता हैं इसलिए इन्हें स्पर्श वर्ण कहा जाता हैं । स्पर्श वर्ण के अंतर्गत कवर्ग से पवर्ग तक आते हैं अर्थात जितने भी वर्ग हैं वह सभी स्पर्श वर्ण कहलाता हैं।

 

 

3 . अन्तस्थ वर्ण – य र ल व अन्तस्थ वर्ण कहलाता हैं , क्योंकि इसका उच्चारण व्यंजन और स्वरों के मध्यवर्ती जैसे लगता हैं और  इनका उच्चारण जीभ , तालु , दाँत , तथा ओठ के परस्पर सटाने से होता हैं । इन चारों वर्ण को अर्द्ध स्वर भी कहा जाता हैं।

 

 

4 . उष्म वर्ण – ष श स तथा  ह को उष्म वर्ण कहा जाता हैं और इसका उच्चारण रगड़ने तथा घर्षण से उत्पन उष्म वायु से होता हैं।

 

 

5 . अल्पप्राण और  महाप्राण – ध्यान दीजिए संस्कृत भाषा में हवा को प्राण कहा जाता हैं इस प्रकार जिस ध्वनि के उच्चारण में कम वायु की आवश्यकता होती हैं वह अल्पप्राण कहलाता हैं तथा जिस ध्वनि अथवा वर्ण के उच्चारण में अधियक समय लगता हैं तो वह महा प्राण कहलाता हैं ।अर्थात प्रत्येक वर्ग का पहला , तीसरा , और पाँचवा वर्ण को अल्पप्राण तथा प्रत्येक वर्ग के दूसरा , चौथा वर्ण महाप्राण कहलाता हैं इसमें विसर्ग की तरह ह की ध्वनि सुनाई देती हैं । 

(Note- वर्ग का मतलव स्पर्श वर्ण होता हैं जिसमें कवर्ग से पवर्ग तक होते हैं , दूसरी बात सभी उष्म वर्ण महाप्राण कहे जाते हैं । )

 

6 . अनुनासिक अल्पप्राण – ङ , ञ , न , ण , म को अनुनासिक अल्पप्राण कहा जाता हैं अर्थात सभी वर्ग के अंतिम वर्ण अनुनासिक कहलाते हैं। 

 

7 . घोष वर्ण और अघोष वर्ण क्या हैं – जिस वर्णों के उच्चारण में केवल नाद का प्रयोग होता हैं वह घोष वर्ण कहलाता हैं स्पर्श वर्णों में प्रत्येक वर्ण का तीसरा चौथा तथा पाँचवा वर्ण , सभी स्वर वर्ण और य र ल व ह को घोष वर्ण कहा जाता हैं । स्पर्श वर्णों में प्रत्येक वर्ग का पहला , दूसरा और श , ष , स अघोष वर्ण कहलाता हैं । 

 

8 . हलन्त – व्यंजन वर्ण के निचे ( ् ) लगाई जाती हैं तो वह हलन्त कहा जाता हैं और जिस वर्ण में हलन्त लग जाता हैं उसमें स्वर का अभाव हो जाता हैं।

(Note-  क्ष , त्र , ज्ञ को संयुक्त वर्ण कहा जाता हैं । )

 

 

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9 . वर्णों का उच्चारण स्थान – मुँह के जिन – जिन स्थानों से वर्ण अथवा ध्वनि निकलती हैं तो मुँह के उस स्थान को वर्णों का उच्चारण स्थान कहा जाता हैं ।  किसी भी वर्ण का उच्चारण स्थान क्या होता हैं उसके बारे में निचे जानकारियां दी जा रही हैं । 

  • कवर्ग , ह , विसर्ग , अ , आ का उच्चारण स्थान कंठ हैं अर्थात इन वर्णों को कंठ से उच्चारित की जाती हैं । 
  • य , श , चवर्ग , इ , ई का उच्चारण तालु से की जाती हैं , आप जब भी इन वर्णों को उच्चारण करते हैं तो तालु की सहायता लेना पड़ता हैं ।
  • तवर्ग , लृ , ल , तथा स का उच्चारण दन्त(दाँत) से किया जाता हैं । 
  • ऋ , टवर्ग , र एवं ष का उच्चारण मूर्द्धा यानी की तालु की ऊपरी से किया जाता हैं । 
  •   उ ऊ और पवर्ग का उच्चारण ओष्ठ से होता हैं । 
  • ण  ङ म ञ और  न का उच्चारण नासिका मतलब नाक से होता हैं ।
  • ए तथा  ऐ का उच्चारण कंठ और तालु से किया जाता हैं । 
  • ओ तथा औ का उच्चारण कंठ + ओष्ठ से होता हैं और व का उच्चारण दाँत तथा ओष्ठ से होता हैं । 

 

 

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कुछ अन्य प्रमुख जानकारियां जिसका निचे वर्णन   किया जा रहा हैं :

 

1 . बला घात या स्वराघात किसे कहते हैं ?

स्वरों के उतार चढ़ाव को बलाघात कहा जाता हैं , कहने का अर्थ हैं की जब हम किसी शब्दों का उच्चारण करते हैं तो उसमें उपस्थित वर्णो में उतर चढ़ाव आते हैं जो बलाघात या स्वराघात कहलाता हैं । किसी शब्द या वाक्य को बोलते समय वाक्यों के सभी अंशो पर बराबर जोर दिया जाता हैं या जोर नहीं दिया जाता हैं , मतलब वाक्यों के किसी  शब्द पर अधिक बल दिया जाता हैं तो कभी किसी दूसरे शब्द पर बल दिया जाता हैं इस प्रकार शब्द के ध्वनियों पर आघात नहीं पड़ता हैं , दूसरी बात यह हैं की जब कोइ शब्द एक से अधिक अक्षरों का होता हैं तो इन अक्षरों पर बराबर बल नहीं पड़ता हैं एक पर कम तो दूसरे पर कम पड़ता हैं अतः वर्णों के उच्चारण में उतार चढ़ाव देखा जाता हैं जिसे ही बलाघात कहा जाता हैं । 

 

 

 2 . सुरलहर या अनुतान(Intonation) किसे कहते हैं – सुरो के उतार चढ़ाव अथवा आरोहो – अवरोही क्रम को सुरलहर या अनुतान कहा जाता हैं जो एकाधिक ध्वनियों की भाषिक इकाई के उच्चारण में सुनाई पड़ता हैं । सुर – तंत्रियों के कम्पन के कारण उत्पन एक ध्वनि के गुण हैं जो स्वर तंत्रियों के प्रति सेकेण्ड कम्पनावृति पर निर्भर करता हैं । सुर किसी एक ध्वनि का होता हैं किन्तु जब एक से अधिक ध्वनियों की किसी इकाई उच्चारण करते हैं तो हर ध्वनि का सुर अलग – अलग होता हैं इस प्रकार सुरो के लहर बनती हैं जिन्हें ही सुरलहर या अनुतान कहते हैं । 

 

 

 3 . संगम(Juncture)  संहिता क्या  हैं – बोलने में एक ध्वनि के बाद दूसरी ध्वनि आती रहती हैं और बोलने वाला एक ध्वनि समाप्त करके दूसरी ध्वनि का उच्चारण करता हैं , एक ध्वनि से जाना दूसरे ध्वनि से दूसरे ध्वनि पर जाना एक अलग प्रकार का होता हैं कभी तो हम सीधे चले जाते हैं और कभी दोनों ध्वनियों के बिच में कुछ नहीं आता हैं जैसे – तुम्हारे में म के बाद ह सीधे आ जाते हैं लेकिन कभी – कभी एक ध्वनि से दूसरे ध्वनि पर जाने जाने पर ऐसा नहीं होता हैं। जैसे – तुम्हारे में ध्वनियाँ वही हैं किन्तु “तुम्हारे जैसा नहीं हैं” यहाँ म तथा ह के बिच में अवकाश अथवा विराम हैं इसी विराम को संगम संहिता कहा जाता हैं। 

 

 

 4 . अल्पविराम संगम (Comma juncture) किसे कहते हैं – इसे  आप उदाहरण से ही अच्छा से समझ सकते हैं ।

जैसे – रोको मत , जानो दो ; रोको मत , जानो दो । 

दिया , तले रख दो ; दिया तले रख दो । 

 

5 . वर्णों का प्रयोग :

वर्णों का प्रयोग अक्षर अथवा शब्द बनाने के लिए प्रयोग किया जाता हैं और शब्दों के मेल से वाक्य बनता हैं जिसमें मात्रा का प्रयोग किया जाता हैं ।

जैसे – (1) पाठशाला एक शब्द हैं जिसमें पा अक्षर हैं , प वर्ण हैं तथा आ का मात्रा ा का प्रयोग किया गया हैं । मतलब – प + आ + ठ + श + आ + ल + आ = पाठशाला ।

(2) अमीर = अ + म + ई + र + अ , इसमें चार वर्ण हैं और म में ई का मात्रा ी लगा हैं ।

(3) पुकार = प + ऊ + क + आ + र + अ । प एक वर्ण हैं तथा पु अक्षर हैं और ऊ का मात्रा ू का प्रयोग किया गया हैं तथा आ का मात्रा ा लगा हैं । 

(4) किचन = क + इ + च + अ + न + अ । क में इ का मात्रा लगा हैं 

वाक्य – रमेश अपना काम समय पर करता हूँ । इसमें छः शब्द हैं और प्रत्येक शब्द में एक से अधिक वर्णों का प्रयोग किया गया हैं , मतलब एक से अधिक सार्थक वर्णों के मेल से शब्द बनता हैं तथा शब्दों के सार्थक मेल को वाक्य कहा जाता हैं इस प्रकार वर्णो का प्रयोग किया जाता हैं । 

(Note- वर्ण तथा अक्षर में कोइ खाश अंतर नहीं हैं बस जिस वर्ण में मात्रा लगता हैं उसे अक्षर बोल दिया जाता हैं तथा जिसमें मात्रा नहीं लगता हैं वह वर्ण कहलाता हैं जिसे तार्किक तोर पर समझा जा सकता हैं ।)

 

                                                               

निष्कर्ष – दोस्तों इस पेज में hindi alphabet के बारे में सार्थक रूप से सम्पूर्ण जानकारियां दी गई हैं  जिसमें प्रमुख रूप से ध्वनि,स्वर वर्ण एवं  व्यंजन वर्ण  के  बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया हैं और साथ में इनके विभिन्न रूपों के बारे में भी जानकारी  दिया गया हैं।   

 

इन्हें भी पढ़े – 

1 . हिंदी Consonant क्या हैं ?                           

2 . Verb किसे कहते हैं ?                            

3 . Adverb किसे कहते हैं ? 

4 . सर्वनाम किसे कहते हैं ? 

5 . present indefinite tense किसे कहते हैं ?

6 . किसे क्या कहते हैं , हिंदी व्याकरण के प्रमुख चीजे के बारे में जाने ?

7 . हिंदी व्याकरण क्या हैं ?

8 . English व्याकरण किसे कहते हैं ? 

 

 

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