sangya sarvanam visheshan , sangya sarvanam kriya visheshn ( संज्ञा सर्वनाम विशेषण और क्रिया विशेषण किसे कहते हैं )

sangya sarvanam visheshan , sangya sarvanam kriya visheshn ( संज्ञा ,सर्वनाम ,विशेषण और क्रिया विशेषण किसे कहते हैं):

परिचय – यहाँ आपको संज्ञा ,सर्वनाम ,विशेषण तथा क्रिया विशेषण के बारे में विस्तार से जानकारियां दी गई हैं यदि आप इन सभी के बारे में जानकारिया प्राप्त करना चाहते हैं तो यह articles आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाली हैं क्योंकि यहाँ sangya sarvanam visheshan तथा   kriya visheshn के बारे में सम्पूर्ण जानकारियां प्रदान की गई हैं जिसे अलग-अलग तरीकों से विस्तार से व्याख्या की गई हैं । संज्ञा, सर्वनाम , विशेषण तथा क्रिया विशेषण एक दूसरे से जुड़ा हुवा होता हैं इसलिए हमें एक दूसरे को समझने में बहुत आसानी होता हैं, जैसे की किसी भी पदार्थ के नाम को संज्ञा कहते हैं,संज्ञा के बदले में जो शब्द आते हैं सर्वनाम कहे जाते हैं तथा संज्ञा तथा सर्वनाम के गुणों को विशेषण कहा जाता हैं  अतः इन्हीं सब के बारे में विस्तार से अध्ययन करने जा रहे हैं।

 

sangya sarvanam kriya visheshn

(संज्ञा सर्वनाम विशेषण तथा क्रिया विशेषण)- 

1 संज्ञा क्या हैं परिभाषा भेद एवं उदाहरण ।

2 सर्वनाम क्या हैं परिभाषा भेद एवं उदाहरण ।

3 विशेषण क्या हैं ।

4 क्रिया क्या हैं ।

5 क्रिया विशेषण क्या हैं ।

 

sangya sarvanam visheshan

 

व्याख्या

1 संज्ञा क्या हैं परिभाषा भेद एवं उदाहरण ।

संज्ञा(Noun) क्या हैं – जिससे किसी वस्तु व्यक्ति या स्थान के ‘नाम‘ का बोध हो तो वह संज्ञा कहलाता हैं ।

जैसे – रमेश , श्याम , गणेश , अरुण , देवेंद्र , अजय , विवेक आदि व्यक्ति का नाम हैं ।

कलम , किताब , कुर्सी , मेज , गेंद , खिलौना , बल्ला , चाकू , आदि वस्तु का नाम हैं ।

पटना , दिल्ली , कोलकत्ता , मुम्बई , बनारस , कर्नाटिका आदि किसी स्थान के नाम हैं ।

संज्ञा का सम्बन्ध किसी के नाम से हैं ,वह नाम किसी का भी हो सकता हैं ,कोइ पदार्थ का नाम हो सकता हैं , अथवा  किसी व्यक्ति वस्तु के गुण स्वभाव आदि के नाम हो सकता हैं , यदि बिलकुल साधारण भाषा में कहा जाए तो नाम को ही संज्ञा कहा जाता हैं । संज्ञा को सम्पूर्ण रूप से समझने के लिए इनके भेदों को समझना होगा अतः हम इनके भेदों को जानते हैं ।

 

संज्ञा के भेद ( sangya ke bhed) :

व्यत्पत्ति के आधार पर संज्ञा के तीन भेद हैं तथा अर्थ के आधार पर संज्ञा के पाँच भेद हैं जो निम्न हैं ।

व्युत्पत्ति के आधार पर –

(i) रूढ़ (ii) योगिक (iii) योगरूढ़ि 

 

अर्थ के आधार पर –

(i) व्यक्ति वाचक संज्ञा (proper noun) 

(ii) जाती वाचक संज्ञा (common noun) 

(iii) समूह वाचक संज्ञा ( collective noun)

(iv) द्रव वाचक संज्ञा (material noun)

(v) भाव वाचक संज्ञा (abstract noun)

 

sangya sarvanam visheshan

 

(i) रूढ़ संज्ञा किसे कहते हैं (Rudh sangya kise kahate hain)वह संज्ञाएँ जिसका खंड निरर्थक हो तो वह रूढ़ संज्ञा कहा जाता हैं अर्थात ऐसी संज्ञा जिसका खंड या टुकड़ा करने पर निरर्थक अर्थ प्राप्त होता हो तो वह रूढ़ संज्ञा कहा जाता हैं ।

जैसे – घर । यदि घर को टुकड़ा करें तो  घ और र प्राप्त होता हैं क्योंकि घ + र = घर होता हैं इसमें  न तो का कोइ सार्थक अर्थ मिलता हैं और न तो का कोइ सार्थक अर्थ मिलता हैं इसलिए घर रूढ़ संज्ञा कहलाता हैं इसीतरह कल , कह , मत , हट आदि रूढ़ संज्ञा हैं ।

 

(ii) योगिक संज्ञा किसे कहते हैं (yogik sangya kise kahate hain)जिस शब्द का खंड सार्थक अर्थ देता हो तो वह योगिक संज्ञा कहा जाता हैं ।

जैसे – पाठशाला । इसका खंड करने पर पाठ और शाला प्राप्त होता हैं क्योंकि पाठ + शाला = पाठशाला , इसमें पाठ का अर्थ अध्ययन करना होता हैं तथा शाला का अर्थ घर होता हैं अतः यहाँ पर दोनों शब्द  का सार्थक अर्थ प्राप्त होता हैं इसलिए ये शब्द योगिक संज्ञा हैं । इसीतरह गौशाला , विद्यालय , चित्रालय आदि योगिक संज्ञा  है ।

 

(iii) योगरूढ़ि संज्ञा किसे कहते हैं (yogrudhi sangya kise kahate hain)जो अपने खंड के अर्थ छोड़कर कोई अन्य अर्थ प्रदान करें तो वह योगरूढ़ि संज्ञा कहा जाता हैं ।

जैसे – जलज । जलज का खंड करते हैं तो जल और ज  प्राप्त होता हैं क्योंकि जल + ल = जलज , यहाँ पर जल का अर्थ पानी होता हैं तथा का अर्थ जन्मा हुवा होता हैं अर्थात पानी में जन्मा हुवा ‘कलम’ हैं । इसीप्रकार सेवाल , घोंघा , काई , जोंक आदि जो जल में उत्पन्न होता हैं । 

 

  अर्थ के अनुसार – 

(i) व्यक्ति वाचक संज्ञा किसे कहते हैं (vykti vachak sangya kise kahate hain)जिससे किसी खाश वस्तु ,व्यक्ति या स्थान के नाम का बोध हो तो वह व्यक्ति वाचक संज्ञा कहा जाता हैं।

जैसे – किताब , कलम , पंखा , तकिया , कंघी , कुर्सी , बल्ब , श्याम , नीरज , विजय , प्रदीप , आनंद , राधा , रानी , काजल , दरभंगा , बनारस , सूरत , गोवा , नालंदा , असम , मधुबनी , राजस्थान आदि व्यक्ति वाचक संज्ञा हैं जो किसी खास वस्तु , व्यक्ति , या स्थान को सूचित करता हैं । दूसरे शब्दों में व्यक्तिवाचक संज्ञा को परिभाषित करें तो- जिससे किसी एक का बोध हो तो वह व्यक्तिवाचक संज्ञा कहा जाता हैं । 

 

(ii) जाती वाचक संज्ञा किसे कहते हैं (jati vachak sangya kise kahate hain)जिससे किसी जाती भर का बोध हो तो वह जाती वाचक संज्ञा कहा जाता हैं ।

जैसे – मनुष्य , मनुष्य कहने से सम्पूर्ण मनुष्य जाती भर का बोध होता हैं ।

लड़का – लड़का कहने से सम्पूर्ण लड़का जाती का बोध होता हैं ।

लड़की – लड़की कहने से सम्पूर्ण लड़की जाती का बोध होता हैं ।

बिल्ली – बिल्ली कहने से सम्पूर्ण बिल्ली जाती का बोध होता हैं न की किसी एक बिल्ली का बोध होता हैं ।

कुत्ता – कुत्ता कहने से सम्पूर्ण कुत्ता जाती का बोध होता हैं न की किसी एक कुत्ता का ।

अब आप समझ गए होंगें की जाती वाचक संज्ञा क्या हैं ।

 

(iii) समूह वाचक संज्ञा किसे कहते हैं (samuh vachak sangya kise kahate hain)जिससे समूह भर का बोध हो तो वह समूह वाचक संज्ञा कहा जाता हैं । समूह वाचक संज्ञा का संबंध किसी के समूह से होता हैं ।

जैसे – भीड़ , भीड़  से यही पता चलता हैं की किसी चीज की समूह हैं जो एक जगह इकठ्ठा हुवा हैं 

मेला – मेला से स्पष्ट होता हैं की बहुत सारे लोगों का भीड़ हैं अर्थात समूह को निर्देश करता हैं ।

इसीतरह  झुण्ड , फौज , गुच्छा , सेना आदि समूह वाचक संज्ञा हैं ।

 

(iv) द्रव वाचक संज्ञा किसे कहते हैं (drav vachak sangya kise kahate hain)जिसे नापा या तौला जाए परन्तु गिना न जा सकें तो वह द्रव वाचक संज्ञा कहा जाता हैं ।

जैसे – पानी , दूध , लोहा , पत्थर , तेल , घी , चाँदी, चीनी , गेहूँ , तिल आदि द्रववाचक संज्ञा हैं जिन्हें हम सिर्फ तौल सकते हैं लेकिन गिन नहीं सकते हैं ।

 

(v) भाव वाचक संज्ञा किसे कहते हैं (bhav vachak sangya kise kahate hain)जिस से किसी वस्तु  व्यक्ति के गुण दोष धर्म स्वभाव आचरण आदि का बोध हो तो वह भाव वाचक संज्ञा  कहा जाता हैं ।

जैसे- ईमानदारी , अच्छाई , सुख , दुःख , जवानी , बुढ़ापा , बचपना , बुराई आदि भाव वाचक संज्ञा हैं जो किसी के गुण , अवस्था, आचरण , स्वभाव आदि का बोध हुवा हैं ।

 

 

sangya sarvanam visheshan

 

*अब इससे आगे ‘सर्वनाम’ के बारे में जानते हैं।

sarvanam kise kahate hain

 

2 सर्वनाम क्या हैं/परिभाषा- संज्ञा के बदले में जिस शब्द का प्रयोग किया जाता हैं वह सर्वनाम कहा जाता हैं , अर्थात संज्ञा का पुनरावृति को बचाने के लिए जिन शब्द का प्रयोग करते हैं वह सर्वनाम कहा जाता हैं क्योंकि किसी वाक्य में संज्ञा का प्रयोग बार-बार करते हैं तो वह वाक्य बेकार लगने लगता हैं इसलिए वाक्य को अच्छा बनाने के लिए सर्वनाम का प्रयोग करते हैं 

जैसे – वह , यह , मैं , तुम , सर्वनाम हैं। इसे वाक्य द्वारा अच्छा से समझते हैं –

गणेश अच्छा लड़का हैं , रमेश कक्षा  पाँच में पढता हैं , रमेश अपने विद्यालय में सबसे अच्छा विद्यार्थी हैं , रमेश सभी का आदर करते हैं । इस वाक्य में रमेश संज्ञा हैं जिसका प्रयोग बार- बार किया गया हैं जो की अच्छा नहीं लगता हैं इसी को खत्म करने के लिए सर्वनाम का प्रयोग किया जाता हैं।

यदि सर्वनाम का प्रयोग किया जाए तो वाक्य इस प्रकार होगा – रमेश अच्छा लड़का हैं , वह कक्षा पाँच में पढता हैं , वह अपने विद्यालय में सबसे अच्छा विद्यार्थी हैं और वह सभी का आदर करते हैं ।

 

सर्वनाम के भेद(sarvanam ke bhed) 

सर्वनाम के छः भेद हैं –

1 पुरुष वाचक सर्वनाम(personal pronoun)

2 निजवाचक सर्वनाम (Reflexive pronoun)

3 निश्चय/संकेत वाचक सर्वनाम (Demonstrative pronoun)

4 अनिश्चय वाचक सर्वनाम ( Indefinite pronoun)

5 प्रश्न वाचक सर्वनाम (Interrogative pronoun)

6 सम्बन्ध वाचक सर्वनाम( Relative pronoun)

 

sangya sarvanam visheshan

 

1 पुरुष वाचक सर्वनाम – प्रथम पुरुष ,मध्यम पुरुष तथा अन्य पुरुष को पुरुष वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं ।

जैसे – मैं , तुम , आप , हम , वह , वे लोग  पुरुष वाचक सर्वनाम हैं ।

 

पुरुष वाचक सर्वनाम के तीन भेद होते हैं जो निम्नलिखित हैं –

1 प्रथम पुरुष ( first person) बोलने वाले को first person कहा जाता हैं ।

जैसे – मैं , हमलोग , हमलोगों को ।

वाक्य – मैं पढता हूँ , मैं खेलता हूँ , हमलोग पढ़ते हैं , हमलोगों को अच्छा काम करना चाहिए ।

 

2 मध्यम पुरुष ( second person) सुनने वाले को second person कहा जाता हैं ।

जैसे – तुम , तुमलोग , तुमलोगों , आप , आपलोगों ।

वाक्य – तुम पढ़ते हो , तुमलोग जाते हो , आप अच्छे हैं , आपलोग खेलते हैं ,  आपलोगों को पढ़ना चाहिए , तुमलोगों कुछ नहीं किया ।

 

 3 अन्य पुरुष ( third person) जिसके बारे में कुछ कहा जाए तो वह अन्य पुरुष (third person) कहा जाता हैं ।

जैसे – वह , यह , ये , से , सो , जो , कौन , क्या , कोइ  या  कोइ भी संज्ञा होता हैं । 

वाक्य – वह घर जाता हैं , वह पढ़ती हैं , श्याम घर जाता हैं , वे लोग गाते हैं , ये किताब हैं , कौन हैं जो अपना काम नहीं करता हैं । 

 

sangya sarvanam visheshan

m

(Note – प्रथम पुरुष का एक वाचक ‘मैं’ होता हैं तथा बहुवचन ‘हमलोग’ होता हैं , मध्यम पुरुष में दोनों वचन आप या तुम होता हैं दोनों वचन में सामान होता हैं तथा अन्य पुरुष में वह यह अथवा कोइ भी नाम एक वचन में होता हैं तथा वे , वे लोग बहुवचन में होता हैं । कुल बात यह हैं की जो बोलता हैं प्रथम पुरुष , जो सुनता हैं वह मध्यम पुरुष , जिसके बारे में कुछ कहा जाए अन्य पुरुष । 

मैंने अपने मित्र रमेश से कहा की रानी अच्छी लड़की हैं तो इसमें ‘मैं’ प्रथम पुरुष हूँ , रमेश मेरा बात सुना तो सुनने वाला मध्यम पुरुष हैं जिसके लिए तुम या आप का प्रयोग करते हैं तथा रानी के बारे में बोला हूँ इसलिए रानी अन्य पुरुष हैं । )

 

2 निजवाचक सर्वनाम –जिससे निजता का बोध हो तो वह निजवाचक सर्वनाम कहा जाता हैं अर्थात जिस सर्वनाम से स्वंग या निज का बोध हो तो वह निजवाचक सर्वनाम कहे जाते हैं । इस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता स्वंग अपने लिए करता हैं ।

जैसे – मैं खुद कर लूँगा । 

मैं स्वंग देख लूँगा ।

श्याम खुद को ख्याल रखता हैं ।

वह मेरा अपना घर हैं ।

 

3 निश्चय वाचक सर्वनाम – जिस से किसी निश्चित वस्तु व्यक्ति या स्थान का बोध हो तो वह निश्चय वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं । निश्चय वाचक सर्वनाम को संकेत वाचक सर्वनाम भी कहा जाता हैं 

जैसे – यह, वह , ये , वे आप आदि ।

वाक्य – यह एक लड़का हैं , वह किताब हैं , यह खिलौना हैं , ये किताब हैं आदि । यहाँ  वाक्य में कर्ता के बारे में जो भी बताया जा रहा हैं वह निश्चित बताया जा रहा हैं अतः इस प्रकार के वाक्य में आए सर्वनाम को निश्चय वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं ।

 

 

4 अनिश्चय वाचक सर्वनाम  – जिस सर्वनाम से अनिश्चिता का बोध हो तो वह अनिश्चय वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं 

जैसे – कोइ , कुछ ।

वाक्य – कोइ आने वाला हैं , कुछ होने वाला हैं , पानी में कुछ हैं , मेरे घर कोइ आया होगा ।

 

 

5 प्रश्न वाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम से प्रश्न पूछा जाए तो वह प्रश्न वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं।

जैसे- क्या , कैसे , क्यों , कब , कौन आदि ।

वाक्य –  यह क्या हैं ?

तुम कैसे करते हो ?

आप क्यों हँसते हो ?

आप कब जाओगें ?

तुम कब आओगे ?

 

6 सम्बन्ध वाचक सर्वनाम – जिस सर्वनाम से कोइ सम्बन्ध स्थापित हो तो वह सम्बन्ध वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं।

जैसे – जो , सो । इसे वाक्य द्वारा ही अच्छा से समझा जा सकता हैं ।

वाक्य – जो जैसे करेगा वैसा पायेगा ।

जो लड़का खेल रहा हैं वह मेरा दोस्त हैं ।

यह वही लड़की हैं जिसकी सभी प्रसंसा करते हैं ।

कोइ भी चीज जो तुम्हें पसंद हो ले लो ।

 

 

sangya sarvanam visheshan

 

*अब इससे आगे विशेषण के बारे में जानते हैं ।

3 विशेषण क्या हैं / परिभाषा – वह शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम के विशेषता बतलावे तो वह विशेषण कहा जाता हैं अर्थात संज्ञा अथवा सर्वनाम के विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहा जाता हैं । ध्यान दीजिए यहाँ पर विशेषता का मतलब गुण , संख्या , मात्रा  या परिमाण होता हैं , यदि कोइ संज्ञा या सर्वनाम इस प्रकार के भाव व्यक्त करता हैं तो वह विशेषण कहा जाएगा ।

जैसे – राधा सूंदर लड़की हैं , इस वाक्य में लड़की का सूंदर होना विशेषता हैं अतः सूंदर शब्द विशेषण हैं ।

हमारे पास मीठे संतरे हैं – इस वाक्य में संतरे मीठे हैं जो संतरे के विशेषता बताते हैं अतः मीठे शब्द विशेषण हैं ।

इसी प्रकार – सूंदर बालक , काला  आदमी , लम्बा आदमी , थोड़ा पानी और लाल कमीज में सूंदर , काला , लम्बा , थोड़ा , लाल  विशेषण हैं ।

 

विशेषण के भेद (visheshan ke bhed)

विशेषण चार प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं –

1 गुणवाचक विशेषण (Adjective of quality)जिस शब्द से किसी वस्तु व्यक्ति के गुण का बोध हो तो वह गुणवाचक विशेषण कहा जाता हैं । जैसे – अच्छा लड़का , सूंदर फूल , अच्छा किताब , लाल कलम , काला लड़का आदि ।

 

2 संख्या वाचक विशेषण (Adjective of number)- जिससे किसी संज्ञा या सर्वनाम के संख्या का बोध हो तो वह संख्या वाचक सर्वनाम कहा जाता हैं । जैसे – चार आदमी , दो बच्चे , पाँच  लड़किया , कुछ आदमी  आदि ।

 

3 परिमाण वाचक विशेषण(Adjective of quantity)जिस से मात्रा या परिमाण का बोध हो तो वह परिमाण वाचक विशेषण कहा जाता हैं । जैसे – कुछ , अधिक , नहीं के बराबर , सब , पूरा , प्रयाप्त , बहुत आदि परिमाण वाचक विशेषण हैं ।

वाक्य – कुछ लोग , कुछ पानी , थोड़ा चावल  पाँच किलोग्राम दूध आदि ।

 

4 सार्वनामिक विशेषण/ संकेत वाचक विशेषण( Demonstrative adjective)जिस विशेषण का प्रयोग किसी वस्तुओं एवं व्यक्तियों को सूचित या इंकित करने में किया जाता हो तो वह संकेत वाचक विशेषण कहा जाता हैं ।

जैसे – यह लड़का हैं , वह आदमी हैं , वे कलम हैं आदि । 

 

 

sangya sarvanam visheshan

 

*अब इससे आगे ‘क्रिया’ के बारे में जानते हैं ।

kriya kise kahate hain:

 

4 . क्रिया किसे कहते हैं – जिस शब्द से किसी कार्य के होने का बोध हो तो वह शब्द क्रिया कहा जाता हैं या जिस से किसी कार्य का संपादन हो तो वह क्रिया कहा जाता हैं ।

जैसे – खाना , बोलना ,पढ़ना , हँसना , दौड़ना , कहना , चलना , टहलना आदि ।

वाक्य – वह खाता हैं । ( इस वाक्य में कर्ता खाता हैं और खाने से कार्य सम्पन होता हैं क्योंकि कर्ता को खाना हैं )

वह बोलता हैं ।

श्याम पढता हैं ।

राहुल दौड़ता हैं ।

वह क्या कहता हैं ।

वह टहलता हैं आदि ।

इस वाक्य में खाता, बोलता, पढता, दौड़ता, टहलता क्रिया हैं और  इन सभी वाक्यों के क्रिया से पता चलता हैं कि कर्ता किसी-न-किसी काम को संपन्न करता हैं ।

 

sangya sarvanam visheshan

 

*अब इससे आगे क्रिया विशेषण के बारे में जानते हैं ।

kriya visheshan kise kahate hain

 

5 क्रिया विशेषण क्या हैं – जो शब्द क्रिया के विशेषता को बताए तो उस शब्द को क्रिया विशेषण कहा जाता हैं अर्थात क्रिया के विशेषता बताने वाले शब्द को क्रिया विशेषण कहा जाता हैं ।

जैसे – (1) वह तेज दौड़ता हैं , इस वाक्य में दौड़ना क्रिया हैं लेकिन कर्ता(वह) तेज दौड़ता हैं तो तेज  क्रिया का विशेषता बता रहा हैं ।

(2) श्याम धीरे चलता हैं , इस वाक्य में श्याम धीरे चलता हैं जहाँ चलना क्रिया हैं और धीरे विशेषण हैं अर्थात क्रिया कि विशेषता हैं कि वह धीरे चल रहा हैं । अतः धीरे चलना  क्रिया विशेषण हैं ।

(3) वह बहुत सूंदर लिखती हैं – वह लिखती हैं इसमें लिखना क्रिया हैं लेकिन सूंदर लिखती हैं तो क्रिया करने में सुंदरता आ गई हैं अतः सुंदर क्रिया कि विशेषता बता रही हैं इस प्रकार सूंदर क्रिया विशेषण हैं । 

 (निष्कर्ष – इस articles में संज्ञा ,सर्वनाम , विशेषण , क्रिया , क्रिया विशेषण के बारे में जानकारी दी गई हैं हमें आशा है  कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपके लिए महत्पूर्ण होगी तथा आपके प्रश्नो के जबाब आवशयक प्राप्त हो गए होंगें ।)

 

इन्हें भी पढ़े1 हिंदी वर्णमाला क्या हैं ? 

2 part of speech किसे कहते हैं ?

3 Verb क्या हैं ?

4 संज्ञा और सर्वनाम में क्या अंतर हैं ।

 

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