Karmadharaya Samas , Karmadharaya Samas kise kahate hain , कर्मधारय समास के परिभाषा एवं उदाहरण ।

Karmadharaya Samas , Karmadharaya Samas kise kahate hain , कर्मधारय समास परिभाषा एवं उदाहरण :

कर्मधारय समास का परिचय – जिस सामासिक शब्द में विशेष्य – विशेषण और उपमान उपमेय का मेल होता हैं जिसे कर्मधारय समास कहा जाता  हैं  कहने का मतलब हैं कि वैसा समास जिसमें एक पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य हो , और यदि दोनों पदों के बिच में विशेषण तथा विशेष्य का सम्बन्ध न हो तो उन दोनों पदों के बिच में उपमान तथा उपमेय का सम्बन्ध होना चाहिए , इस पेज में इन्ही के बारें में विस्तार से अध्ययन करने जा रहे हैं इससे पहले आपको बता दें कि  यदि आप समास के बारे में जानकारियां प्राप्त कर चुके हैं तब तो  ठीक हैं नहीं तो समझने में दिक्कत हो सकती हैं क्योंकि कर्मधारय समास भी एक समास का ही भेद/प्रकार हैं दूसरी बात डाली(शाखाएँ) को समझने के लिए पहले जड़ को समझना जरूरी होता हैं परन्तु अभी तो सिर्फ कर्मधारय समास के बारें में जानना हैं ।

 

karmadharaya samas kise kahate hain :

 

karmadharaya samas ki paribhasha

कर्मधारय समास किसे कहते हैं – कर्मधारय समास उस समास को कहा जाता हैं जिसमें एक पद विशेषण हो तथा दूसरा पद विशेष्य हो और यदि विशेषण और विशेष्य नहीं लगा हो तो उपमान तथा उपमेय लगा हो तो ऐसे समास को कर्मधारय समास कहा जाता हैं दूसरी बात यदि विशेषण और विशेष्य नहीं लगा होगा तो उसमें उपमान तथा उपमेय आवश्य लगा होगा तभी वह कर्मधारय समास होगा। जैसे –

चन्द्रमुख – चंद्र के समान मुख ।

चरणकमल – कमल के समान चरण ।

नीलकमल – नीला हो कमल ।

पीताम्बर – पीत हैं जो अम्बर 

कृतज्ञ – उपकार को मानने वाला ।

नीलगाय – नीला गाय ।

 

अब इसमें चार बातें को समझना हैं वह हैं विशेषण,विशेष्य,उपमान और उपमेय और ये चारो किस प्रकार काम करते हैं वह भी देखना बहुत जरूरी हैं तभी हम इस समास का पहचान कर सकते हैं 

विशेषण – विशेषण वह शब्द होता हैं जो किसी संज्ञा तथ सर्वनाम कि विशेषताओं को बताते हैं अर्थात जो विशेषता बताता हो ।

विशेष्य – जिस शब्द कि विशेषता बताई जाती हैं उसे विशेष्य कहा जाता हैं ।

उपमान – जिससे उपमा दी जाती हैं वह उपमान कहा जाता हैं ।

उपमेय – जिसकी उपमा दी जाती हैं वह उपमेय कहा जाता हैं ।

 

जैसे 

विशेषण तथा विशेष्य वाले शब्द –उपमान तथा उपमेय वाले शब्द –
नीलगगन – नीला हैं जो गगन जिसमें नील विशेषण हैं तथा गगन विशेष्य हैं और भी कुछ उदाहरण लेते हैं जो निम्न हैं कनकलता – कनक के समान लता । इसमें कनक उपमान हैं तथा लता उपमेय हैं । 
दुरात्मा – बुरी हैं जो आत्मा ।घनश्याम – घन के सामान श्याम ।
पर्णकुटी – पर्ण से बनी कुटी । नरसिंह – सिंह के समान नर ।
महादेव – महान हैं जो देव ।करकमल – कमल के समान कर(हाथ)  ।

 

 

इन्हें भी पढ़ें- 1  हिंदी वर्णमाला क्या हैं ।

2 वाक्य किसे कहते हैं ।

 

 

karmadharaya samas ke udaharn – एवं भेद 

हम उदहारण के साथ-साथ इनके भेदों को भी समझ लेते हैं जो कि भेदों के साथ उदाहरण को भी समझते जायेंगें-

इनके भेद –(1) विशेषता वाचकजिस शब्द से विशेषण-विशेष्य का भाव सूचित होता हो उसे विशेषता वाचक कर्मधारय समास कहते हैं ।  

(a)जो प्रथम पद विशेषण होता हैं , जैसे – महाजन , परमानंद , परमात्मा , सज्जन , दीनबंधु , नीलध्वज , खड़ीबोली , कालापानी , कलमुँहा , कालीमिर्ची ।

(b) विशेषण उत्तर पद – जिसमें दूसरा पद विशेषण होता हैं ।

जैसे – मुनिश्रेष्ठ , घनश्याम , पुरूषोतम , नराधम , प्रभुदयाल ।

(c) विशेषण उभय पद – जिसमें दोनों पद विशेषण होते हैं ।

जैसे – श्यामसुन्दर  , भला बुरा , नीलपीत, शीतोष्ण ।

(d) विशेष्य उभय पद जिसमें दोनों पद विशेष्य हो ।

जैसे – आम-वृक्ष , गुरू-देव , नारी- रत्न 

(e) अव्यय पूर्वपद – जिसका पहल पद अव्यय हो , परन्तु विशेषण का कार्य कर रहा हो ।

जैसे – दुर्वचन , निराशा , सुयोग्य , कुवेश , दुकाल , अधमरा आदि ।

 

(2) उपमा वाचक कर्मधारय :

उपमान पूर्वपद – जिस समास में पहला पद उपमान और दूसरा पद उपमेय हो ।

जैसे – प्राणप्रिय , कमलनयन , व्रजदेह , तुषारधवल , आदि ।

 

 

कुछ अन्य – 1.उपमित कर्मधारय – जिसका पूर्व पद उपमेय तथा उत्तर पद उपमान हो ।

जैसे – चरण – कमल , भवनिधि , क्रीर्तिलता , चरितामृत आदि ।

2 . रूपक कर्मधारय – जिसमें पहला पद दूसरे पद का रूपक हो , उपमेय को ही उपमान स्वीकार कर लिए जाते हैं ।

जैसे – विद्यारत्न, संसारसागर , भवसागर , शोकानल , भक्तिशुधा , आशालता आदि ।

 

इन्हें भी पढ़ें – समास किसे कहते हैं ।

 

 

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